२))अब तू आ भी जा
❆ ग़ज़ल सृजन – अब तू आ भी जा
❆ काफ़िया (तुकान्त) – आन
❆ रदीफ़ (सामन्त) – अब तू आ भी जा
❆ तिथि – 15 जून 2018
❆ वार – शुक्रवार
हो के मुझ पे मेहरबान अब तू आ भी जा
दिल में है इक तूफ़ान अब तू आ भी जा
तेरी याद सताती है मुझे हर पल हर दिल
ओ मेरे नटखट “इशान” अब तू आ भी जा
तरस रहीं हूँ मु्द्दत हो गयी है तेरा दीदार किये
तेरे लिये बनाये है पकवान अब तू आ भी जा
तेरे क़दमों की हलचल बिन अब दिल लगता नहीं
तेरे बिन सूना है यह बाग़वान अब तू आ भी जा
मेरे लख्तेजिगर अबकी बरस तू आना जरूर
मेरे नन्हे ” इरा “की जान अब तू आ भी जा
इरा जौहरी
लखनऊ
#सम_तुकान्त_के_उदाहरण – आन, दूकान, पहलवान, सलमान, वरदान, शान, कान, मान, अजान, तान, जान, कुर्बान, आदान प्रदान, समान, सम्मान, धान, पासबान, खानदान, शैतान, नुकसान, बागबान, मुस्कान, विमान, मकान, किसान, लगान, मेहरबान, बेजुबान, जुबान, पान, कद्रदान, खान, आसमान, विमान, अर्कान, गुमान, ईमान……इत्यादि
गजल -अब तू आ भी जा
१५/६/२०१८



