१))आँख मूँद करती हूँ यह प्रयास सदा
गजल
#काफ़िया_मिलाओ –
दिनांक – 10 जून 2018
काफिया -आस
आँख मूँद करती हूँ यह प्रयास सदा ,
नयनों मे बस रहूँ तेरे ही आसपास सदा ।
अन्तर्मन का दुख कह तो जरा ,
रहने ना दूँगी तुझे उदास सदा ।
प्रियतम प्यारे हूँ तेरी और तेरी ही रहूँगी ,
अटल वादा करती हूँ कि रहूँ तेरे पास सदा ।
मन के आइने में झाँक के देख जरा,
तेरी ही मूरत का है वहाँ वास सदा ।
तू मेरा है और मै तेरी जग जाने सारा ,
प्रिय संग मनाये इरा मधुमास सदा ।
इरा जौहरी
लखनऊ
★ #बशीर_बद्र जी द्वारा लिखित पूरी ग़ज़ल ★
.
ख़ुश रहे या बहुत उदास रहे।
ज़िन्दगी तेरे आस पास रहे।
चाँद इन बदलियों से निकलेगा,
कोई आयेगा दिल को आस रहे।
हम मुहब्बत के फूल हैं शायद,
कोई काँटा भी आस पास रहे।
मेरे सीने में इस तरह बस जा,
मेरी सांसों में तेरी बास रहे।
आज हम सब के साथ ख़ूब हँसे,
और फिर देर तक उदास रहे।
गजल
९/६/२०१८


