औरत की मृत्यु
लघुकथा
औरत की मृत्यु
पता नहीं क्यूँ इन दोनो की शादी हुई थी ।हमें तो यह शुरु से ही पसन्द नहीं थी ।अच्छा होता कि इन दोनो का तलाक़ करवा दिया जाता । रहती यह अपने घर । यह सब बाते पिघले सीसे की तरह रिया के कानों मे पड़ रहीं थी ।अपने कमरे मे वह घुट घुट कर रो रही थी सोच रही थी कि किसको दोष दूँ माँ बाप को जिनको उसकी शादी करने की जल्दी थी या पति को जिसके दिमाग पर लकवा मार गया था या उन लोगो को जिन्हें पता था कि बीमार तो उनका अपना ख़ून है फिर भी दूसरे घर से आई स्त्री को सब बातों का दोषी ठहरा रहे थे ।
उसको लग रहा था कि उसकी तो मृत्यु उसी दिन हो गयी थी जब उसकी शादी हुई थी।
इरा जौहरी
लखनऊ
लघुकथा
औरत की मृत्यु
६/५/२०१८

