काव्य /बारिश
चित्र आधारित काव्य रचना
बारिश
अबकी बरस हुई जो घनघोर बारिश ,
बन गयी सकरी सड़के नदिया सलोनी ।
बारिश के पानी में भीगें थे सब मिल कर ,
करी फिर मस्ती याद रहे जो जीवन भर ।
नाच रहे थे हम मिल कर जो ता ता थइया ,
फिसल कर गिरे थे तभी अपने चुन्नू भइया ।
देख शैतानी नादानों की माँ ने आवाज लगाई ,
लाल निक्कर में सरपट दौड़ पड़े मुन्नू भाई ।
वो दिन भी क्या थे बचपन के और बारिश का पानी ,
नहीं भूलेगी“इरा” कभी वो नटखट मस्ती और नादानी ।
इरा जौहरी
मौलिक
चित्र आधारित रचना
२२/९/२०१८




