चन्द्रकला या मीठी पूड़ी !!!!होली स्पेशल !!
चन्द्रकला या मीठी पूड़ी
चन्द्रकला या मीठी पूड़ी भी होली के पकवानों मे अपना विशिष्ट स्थान रखती है जब गुझिया से मन भर जाये तब चन्द्रकला बना कर मीठी पूड़ी का आन्नद लीजिये सावन की दूज पर हमारे मायके मे परम्परा के तौर पर यह अवश्य ही बनती है हमारी माँ हमारे लिये इसे बड़े प्रेम से बनाती है हम भाई बहन दोनो को ही यह बहुत पसन्द है
इसकी भरावन सामग्री भी गुझिया की तरह ही तैयार की जाती है यानी खोया भून कर और मेवे व मिठास मिला कर यदि ज्यादा मीठा चाहे तो इसे बाद मे चाशनी मे पागा भी जा सकता है
विधि
१ कटोरी मैदा
१ कटोरी मावा ( खोवा ) चीनी अपने स्वादानुसार पड़ेगी कम मीठा खाना चाहे कम डाले ज़्यादा मीठा खाना चाहे ज़्यादा डाले बनाने से पहले एक बार चख ले जितना मीठा खाना चाहे उतना मीठा मावा ( खोया ) या भरवान वैसा बनाये
इलाइची पसन्द हो तो छोटी इलाइची भी पीस कर मावे मे मिलाये
२ चम्मच घी मोयन के लिये
२ कटोरी घी तलने के लिये
मैदे मे घी डाल कर अच्छी तरह मसले
घी उतना डाले जितने मे मसलने पर मुट्ठी बँधने लगे
अब हल्का पानी डाल कर कड़ी मैदा माँड़े
मैदा उतनी कड़ी हो जितने मे बिल जाये
अब मैदे की छोटी छोटी। लोइयाँ काट कर चिकनी चिकनी लोई बनाये। फटी हुई लोई से गुझिया फट जायेगी
लोई को गोल गोल बेले
एक अलग कटोरी मे १ चम्मच मैदे मे १ चम्मच पानी डाल कर लोई जैसा घोल बनाये
बिली हुई गुझिया की पूड़ी की तरह की लोई को हाथ मे उठा कर किनारों पर मैदे का घोल लगाये
मोड़ कर किनारे पर चिपकाये फिर बीच की ख़ाली जगह पर मीठा मावा भरे
और फिर पूरा किनारे पर चिपका कर गोठे या फिर गोल गुझिया बनाने के साँचे मे रख कर गुझिया की डिज़ाइन बनाये
जब सब बन जाये। धीमी आँच में कढ़ाई या पैन मे तले
तलते समय बार बार ना चलाये
जब एक तरफ़ सिक रही हो कनछुली हिलाते हुये दूसरी तरफ़ घी डालते रहेइससे चन्द्रकला फूली फूली बनेगी
ध्यान रहे चन्द्रकला पर कनछुली का कट ना लगे नही तो फटने का डर रहता है
जब एक तरफ़ सिक जाये तब पलट कर दूसरी तरफ़ सेके
हल्की गुलाबी होते ही निकाल ले
धीमी आँच पर तलने पर अन्दर तक सिक जाती है और स्वादिष्ट बनती है चन्द्रकला मे अगर मिठास कम लगे तो चीनी की चाशनी बना कर पाग दे मीठी हो जायेगी
इरा जौहरी





