चौपाल
*लघु कथा
चौपाल
आज फिर गाँव की चौपाल पर भीड़ जमा थी रमुआ की दुल्हन के बच्चा ना होने का कारण निरंजन की बेवा का डायन होना बताया जा रहाथा और साथ ही कुछ समय पहले जब से चौधरी का पोता नही रहा तब से चौधराइन भी यही कह रही थी कि ऊ डायन ही सब बलाओ की जड़ है निरंजन की बेबा सब समझती है कि काहे सब उसे डायन बताने पर तुले हुये है उसके पास जो थोड़ी बगुत जमीन है सब उसे हथियाना चाहते है काहे कि उसके आगे पीछे कोई उसका नही है उसने भी सोंच लिया था कि वो उन सबकी दाल नही गलने देगी सो उसने भी गाँव की मास्टरनी को सब बातें बता कर कि आगे क्या करना है जान लिया था जैसा कि आज उसे अंदेशा था कि ये सब मिल कर आज उसे मार ही डालेंगे जब पंचों ने उसे जला कर मारने का फ़रमान सुनाया और सब मिल कर उसे मारने ही जा रहेथे तभी उसमे देखा पुलिस की जीप चली आ रही है मिनटों मे भीड़ छँट गयी मोबाइल से वीडियो बनाने वाले भी खिसक गये और वह आज़ाद हो गयी आज वह जान गयी थी कि हिम्मत से सब कुछ संभव है
इरा जौहरी
३१/१/२०१८
लखनऊ (उत्तर प्रदेश )
चौपाल
३१/१/१८

