जानें कहाँ गये वो दिन !!!!!!!! पाँचवाँ भाग।
जाने कहाँ गये वो दिन
हमारी पँचवीं रचना
घर के पिछवाड़े खुले मैदान मे बिखरे कँटीले पीले फूलों वाले पौधों को देख कर बरबस मन बचपन की यादों मे चला गया जब हम बच्चे काँटों की परवाह किये बिना फूलो की पंखुड़ियों को तोड़ कर होंठों पर रख कर फूँक मार कर बाजा बजाया करते थे दिल किया कि जाऊँ और और बाजा बजाऊँ ।करौंदे और नींबू की पत्तियो को मोड़ कर उनसे पिपहरी बनाना हम लोगो का प्रिय खेल था और जब नानी के पास गाँव जाते थे वहाँ खेतों से टूट कर आये हुये ताज़े नारी के साग के मोटी खोखली डाण्डियों को तोड़ कर उनसे पिंपहरी बजाना हमने अपनी नानी से सीखा वो बाजा बना और बजा कर हम बच्चो को दिया करती थी और हम सब उनके साथ लगे रहते थे बहुत याद आता है वह समय ।
सुख और दुख का संगम ही जीवन है और इसमे जीवन जीते जाना ही जिन्दगी । परिस्थितियाँ अपने समय पर ही बदलती हैं जो बुरे वक्त मे खुश रहने की कला सीख लेता है वही हमेशा खुश रहता है और हमेशा खुश रहने के लिये ज़रूरी है कि ख़ुद को हमेशा व्यस्त रखा जाये जो व्यस्त रहता है उसके पास कुछ गलत करने और सोचने का समय ही नही रहता जीवन मे मुश्किल समय भी आया और वक्त के साथ मुश्किल समय भी धीरे धीरे गुजर गया बच्चो के बचपन का समय कैसे गुजर गया वक्त का पता ही नही चला उनके बड़े होने पर समय का ख़ालीपन जब काटने लगा बच्चो ने मन लगाने के लिये फेसबुक से हमे जोड़ दिया इसकी भी भूमिका आज के जीवन मे बहुत बड़ी है इसने हमे हमारी पुरानी सहेलियों से मिलवाया जिनसे मिल कर बीते दिनो की यादों मे हम आज भी जी लिया करते है कुछ नयी सहेलियाँ भी बनवाई जिनके साथ हमारा आज सुन्दर बन गया
आज हम जहाँ रहते है वहाँ आम शहरी सभ्यता संस्कृति फल फूल रही है यानी हर व्यक्ति अपने आप मे मसरूफ मस्त बस वह यह चाहता है कि जब उस पर मुश्किलें आये सब उसका साथ देने के लिये सामने आकर हाथ बढाये पर ख़ुद वह सिमट कर हर समय अपने घरौंदे मे रहना चाहता है वह और उसके बच्चे ही उसकी जिन्दगी होते है आज के अकेलेपन के समय जब बीते दिनो के बारे मे विचार करती हूँ तो बीते हुये वो पल बहुत याद आते हैं जब दोपहर में माँ आसपास की चाची ,काकी के साथ घूप मे बैठ कर कुछ रचनात्मक कार्य करते हुये वक्त गुज़ारा करती थी सब आपस मे ही एक दूसरे से कुछ सीखा करते थे हमनें भी अपनी सहेली के साथ उस समय मैक्रम की गाँठ लगानी सीखी थी और थैले बनाये थे जिनको हमने आज भी संभाल कर रखा हुआ है और जब भी उनको देखती हूँ बरबस बीते दिन याद आने लगते है
हमेंशा कुछ करते रहने और सीखने की चाह की वजह से बच्चो के छोटे रहने पर भी उनको अपने साथ लगाये रहती थी उनके नन्हे नन्हे हाथो से की गयी कलाकारी जो हमने संभाल कर रखी हुई है उसे देख कर वो बीते हुये पल याद आ जातें है
अभी कल घर की सफ़ाई मे लगी हुई थी कि दिवंगत पूज्य ससुरजी की डायरी हाथ लग गयी बीते समय की बहुत सी बातें खट्टी मीठी यादें आँखों के सामने जीवंत हो उठीं उसमे वो पुरानी बातें मिली जब हमारे जेठ का भी जन्म नहीं हुआ था उनके पिता जी की बातें सच मे पढ कर लगा हम उस समय मे पँहुँच गये हो हमारा आज ही हमारे बच्चो के लिये बीता हुआ कल बन जाता है सुखद पल याद कर के दिल हमेशा यह कहता है जानें कहाँ गये वो दिन
उनकी यादगार रचना की दो पंक्तियाँ जो हमेशा मै गुनगुनाती रहती हूँ
पेश है
नयी उमंगें नयीं तरंगें , हम दोनो के साथ रहेंगी
कल हम जब साथ चलेंगे , तुम सबको प्रणाम करेंगे
और पूज्य माताजी व पिताजी साल भर के अन्तर पर साथ साथ ही इस दुनिया से विदा हो गये
इरा जौहरी
१७ -११- २०१७



