तेरी रूह से
२४)
मुशायरा
तेरी रूह से गर इश्क़ ना होता
रुखसत कर जाते न जाने कब का
बैठे है कफ़न बाँधे सिर पे
रुख़ ना करते कभी इधर का
जो तेरी याद आई
मयखाने मे मुझे खीच लाई
पर ना मिला तू
मिली तो तेरी रुसवाई
इरा जौहरी
१४/२/२०१८
पहला मुशायरा
पृष्ठ(२४)
तेरी रूह से
१६/२/२०१८


