पगली
लघु कथा
पगली
पटना की व्यस्त सड़क के किनारे अर्धविक्षिप्तावस्था में घूमती स्त्री को पगली कह कर दुत्कारते देख उसका मन विस्तृष्णा से भर गया ।पास जा कर उसने उसे लोगो से दूर किया ।और उसे ले कर मानसिक अस्पताल पँहुच गयी ।
वहाँ पँहुच कर साक्षी ने डा. से मिल कर अस्पताल देखने की इच्छा ज़ाहिर की ।वहाँ उसने पाया कि अस्पताल में रोगियों को अलग अलग समूहो मे रखा गया है एक तरफ के समूह के लोगो से मिलने पर लगा कि ये तो बहुत हद तक स्वस्थ हैं व घरों मे रह सकतें हैं और इस तरह के लोगों मे स्त्रियों की संख्या अधिक थी ।बडी बात डा. ने यह बताई कि इस तरह के लोगो को मानसिक रोगी कहना चाहिये ।पागल या पगली कह कर इनका उपहास नही उड़ाना चाहिये ।
वह अभी खड़ी सब देख ही रही थी कि एक लड़की दौड़ती हुई आई और तेज़ी से उसे बाँहों मे जकड़ लिया बोली “दीदी घर ले चलो “मंजरी अचानक हुये इस वाक़ये से सहम सी गयी ।
तब साथ मे गये डा. ने पहले उससे उसे अलग किया और फिर बताया कि” इस तरफ रहने वाले मरीज़ अब घरों मे जाकर रह सकतें है पर क्या करे पुरुषों को तो ठीक होने पर लोग घर ले जाते है जबकि स्त्रियों को एक बार यहाँ छोड़ कर जाने वाले जल्दी वापस लेने आते ही नही ।अक्सर यहाँ छोड़ने के बाद पुरुष दूसरी शादी करके घर बसा लेते है उन हालातों मे भी स्त्रियाँ वहाँ वापस नहीं जाना चाहती अब इसी को लीजिये जिसने आपको पकड़ा था वह घर जाना चाहती है पर इसके पति ने इसकी ही बहन से दूसरी शादी कर ली है ।अब वो इसको घर ले जाना ही नही चाहता और अभी हाल में यह घर गयी थी पर बदले हालात मे इसकी तबियत और खराब हो गयी इसे फिर से भर्ती करना पड़ा। अस्पताल मे स्त्रियों की संख्या ज्यादा संख्या होने का एक कारण यह भी है ।”
एक और कारण जो साक्षी को समझ मे आया वह यह भी था कि पुरुषो की कमाई से घर चलता है जबकि स्त्री की अनुपस्थिति मे दूसरी स्त्री पुरुष को सहज उपलब्ध हो जाती है ।वह सोंचने लगी कि यदि इन महिलाओ को कुछ एसा कार्य सिखाया जाये जिससे उनकी आय के स्रोत खुले तो इससे उनमें आत्मविश्वास तो आयेगा ही साथ ही समाज मे उनका स्थान भी ऊँचा होगा ।अब वह मन मे नारी के उत्थान की योजना के दृड़ संकल्प के साथ वह वापस हो रही थी ।
इरा जौहरी
स्वरचित
लघुकथा /पगली
१६/७/२०१८

