बोलती तस्वीर / काव्य
❆ बोलती तस्वीर –
❆ तिथि – 07 अक्टूबर 2018
❆ वार – रविवार
देखा जब इस बोलती तस्वीर को ,
लगा हमसे रूबरू हो कुछ कहती है ।
शायद बीता लम्हा याद दिलाती है ,
वो नादां बचपन पापा और हम तुम ।
पिता की ऊँगली थाम चला करते थे ,
याद है भाई बचपन में जब हम तुम ।
निर्भीक निडर बन दूर फिरा करते थे ,
मस्त पवन के झोंकों से बहा करते थे।
पर आज वही पिता वृद्ध व अशक्त हैं ,
परिस्थितिवश अकेले रहनें को विवश हैं ।
चाह कर भी तुम पास आ सकते नहीं ,
हम भी हर पल साथ रह सकते नहीं।
अक्सर अकेले में दुखी मन बहुत रोता है ,
चाहने पर भी कुछ भी ठीक नही होता है ।
आज ही बुआ के जाने की खबर आई है ,
पापा ने दी दुखी हो उनको आज विदाई है ।
थोड़े कहे को बहुत समझना मेरे भाई ,
बचपन की वो यादें और वो दिन सुहाने ।
देखो आज चित्र देख हमें कहाँ खींच लाई,
“इरा”की जिन्दगी में अनमोल हो मेरे भाई ।
इरा जौहरी
लखनऊ
. बोलती तस्वीर /काव्य
८/१०/२०१८

