बोलती तस्वीर
❆ बोलती तस्वीर –
❆ तिथि – 20 अगस्त 2018
❆ वार – सोमवार
देख कर तस्वीर याद आ गया वह गुज़रा जमाना ,
वो नानी का गाँव और बचपन में वो ननिहाल जाना ।
मिट्टी से बने चूल्हे पर पकती दाल ,सब्जी और चावल ,
पराठे भी हैं सिकते जाते चूल्हे पे और मड़ रहा आटा है।
कहीँ बसी किसी बस्ती के घर की,
रसोई का चित्र लगता है आज ।
मिट्टी की दीवार के बीच जलता मिट्टी का चूल्हा ,
मिटाने को सबकी भूख जलती चूल्हे की आग।
और आग पर है पकता सु स्वादु भोजन ,
भोजन में है मिट्टी की खुशबू और प्यार ।
माँ ,पत्नी ,बहन ,मामी ,चाची ,काकी ,
मौसी और ताई हो सकती है कोई भी ।
लाल चूड़ियाँ मधुर ध्वनि में हैं बजती,
बड़ी सी लाल टिकुरिया सिदुरे की ,
सूर्योदय के सूर्य सी माथे पे है सजती,
आओ सब भोजन है तैयार यह कहती ।
गरमागरम पराठे सब्जी और अचार,
स्वादिष्ट मनभावन भोजन है तैयार ।
आओ मिल जुल कर खाओ अब,
मिल “इरा “भोजन पर्व मनाओ सब।
इरा जौहरी
लखनऊ
#स्वरचित
बोलती तस्वीर
२०/८/२०१८

