मित्र को पत्र /फेसबुक के आभासी मित्र
❆ पत्र
❆ विषय – मित्र के नाम
❆ तिथि – 31 अक्टूबर 2018
❆ वार – बुधवार
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▼ #पत्र
प्रिय फेसबुक के आभासी मित्र
असीम स्नेह
यहाँ मैं कुशलपूर्वक रहते हुये आशा करती हूँ कि आप सभी की कुशलता की मंगल कामना करती हूँ ।यूँ तो हम फेसबुक पर नित्य ही मिलते और बात करते ही रहतें है पर आज सोंचा क्यों ना आप सभी को आज संयुक्त रूप से पत्र लिखूँ ।पहले मैं बहुत अकेलापन महसूस करती थी पर जब से आप लोगो की मित्रता के रंग में रंगी हूँ मुझे पता नही चलता कि अकेलापन क्या होता है ।एक दिन भी आप सबसे ना मिलूँ तो चैन ही नही पड़ता ।तो कुछ ना कुछ करके आप सबसे मिलने फेसबुक पर पँहुच ही जाती हूँ ।हाँ इस फेसबुक पर भी आप सबसे मिलवाने का कार्य हमारी पक्की सहेलियों ने ही किया ।और साथ ही पुरानी सहेलियों से भी ।सोंचो तो कभी कभी लगता है कि जिसे हमने कभी देखा ही नही पर उसे अक्सर दिल के करीब अपनो सा पाते हैं ।यह ख़ूबी है इस फेसबुक की ।हम इसमें अपना आभासी परिवार पाते हैं जहाँ सब अलग अलग परिवार व परिवेश से होते हुये भी एक दिल मे रहते हैं ।
पहले अक्सर अकेलेपन से परेशान हो कर खाना भी नही बनाती थी पर ब से आप सबका साथ मिला है ।तस्वीरों के ही जरिये चाहे मिल बाँट कर खाने मे भोजन का स्वाद बढ जाता हैं ।हलाँकि आप लोग भोजन को चखते भी नही है ।परअपनी तारीफ़ों के ऐसे पुल बाँधते हैं कि हमे मजा आ जाता है और भोजन करते समय स्वाद दूना हो जाता है ।
आज मै अपने सभी आभासी मित्रों से एक बात कहना चाहती हूँ कि स्वयं को कभी अकेला ना समझें यहाँ इस फेसबुक पर हम सब एक साथ हैं एक बार सबसे बात तो कर के देंखे कभी अकेलापन नही लगेगा ।
इधर जब से लिखना शुरु किया है ।आप सभी के साथ जुड़कर हमारी मित्रता और गहरी हो चली है ।जब तक हर रचना पर आप सबकी उपस्थिति दिख ना जाये चैन ही नही पड़ता लगता है कि कुछ कमी रह गयी है ।हमारे लेखन पर एसे ही अपनी मित्रता का प्यार भरा छौंकन लगाते रहिये ।आप सभी से मिलने को आतुर आपकी अपनी
इरा जौहरी
लखनऊ
स्वरचित
मित्र के नाम पत्र/फेसबुक के आभासी मित्र
३०/१०/२०१८

