मुशायरा!!!!! इश्क का काग़ज़ !!
मुशायरा
फेसबुक पर एक समूह मे होने वाले मुशायरे मे हमारे द्वारा प्रस्तुत किये गये शेर
अर्ज किया है
धीरे धीरे बाते करते हुये तुम मेरी जिन्दगी कब चले आये
और कब आ कर इश्क की गुफ़्तगू कर कर गये मालुम ही ना पड़ा
इरा जौहरी
इश्क मे दीवाने हो कर तूने क्या क्या ना किया
महज़ फेसबुक फ्रैंड को महबूबा समझ लिया
इरा जौहरी
ख़यालों मे डूब के जो काग़ज़ पर लिखा पैग़ाम इश्क का
उन्होंने बड़ी बेमुरव्वती से उसे जहाज़ बना कर उड़ा दिया
इरा जौहरी
किसी को हर हाल में हासिल करना ही मोहब्बत नही
यूँ ही बाबस्ता दिल मे बस जाना ही सच्ची मोहब्बत है
इरा जौहरी
५)यह दिल बहुत बेचारा कुछ मासूम सा है
महज़ काग़ज़ के टुकड़े से ठुकरा के इसके टुकड़े ना कर
इरा जौहरी
६)दीदार तेरा क्या रंग लायेगा
अभी तो बिन देखे ही दीवाने है हम
😌😌इरा जौहरी😌😌
७)अधूरी चाहतों से मुकम्मल जहाँ नहीं होते
जो इश्क करते है वो दिल से जुदा नही होते
😌😌इरा जौहरी😌😌
८)जब तक तुम लिखोगे पैग़ामों मोहब्बत काग़ज़ पर
हम किसी के धड़कते दिल मे घर बसा चुके होंगे
😌😌इरा जौहरी😌😌
९)इश्क मे वो ख़ूबी है क्या से क्या ना कर जाये
कृष्ण मे राधा और राधा मे कृष्ण समा जाये
🌼🌼इरा जौहरी🌺🌺
१०)जो मिल जाये साथ तकदीर का
इश्क भी बेनज़ीर हुआ करती है
😌😌इरा जौहरी😌
११)यह कैसा रिश्ता है जो मुहब्बत की स्याही से काग़ज़ पर उतर कर
दिल के जादुई आइने मे जिन्दगी भर के लिये बन्द हो जाता है
इरा जौहरी
१२)दिल की बात काग़ज़ पर लिखने का ज़माना गया
अब तो अँगूठा हिलाओ हाल ऐ दिल बयाँ कर दो
😌😌इरा जौहरी😌😌
१३)हसरतों का क्या है वो ना कभी पूरी हुई हैं और ना ही होगी
पर इश्क करने वालों ने पैगाम लिखे है और फ़ना होते रहेंगे
इरा जौहरी
१४)रास्ता जिसका देखा वह हासिल ना हुआ
हो सकता है वह मुकम्मल जहाँ ही ना हो
😌😌इरा जौहरी😌😌
१५)पत्थर के सनम के दिल मे भी कुछ निशान छूट जाते है
रहगुज़र हो जब दिल अपना, वो उनके नाम कर जातेहैं
😌😌इरा जौहरी😌😌
१६)अभी अभी पूँछा सनम ने कर क्या रही हो
छोड़ो मोबाइल आओ बैठो पास मेरे
हमने जबाब दिया अभी नहीं ,अभी तो
साहित्य सागर के मुशायरे के समन्दर में गोते लगा रहे हैं
😌😌इरा जौहरी😌😌
१७)बेख़ुदी में रोते हुये ज़ख़्मी दिल को किसने देखा है
बेमुव्वत मोहब्बत ऐ अंजाम अक्सर बुरा होता है
💔इरा जौहरी💔
१८)ये किस्से होते है बीते बरसों के हिस्से
जो झांक जाते हैं यादो के दरो दीवारों से
🌺😌इरा जौहरी😌🌺
१९)क्या खोना क्या पाना जिन्दगी है इक आबदाना
ढूँढते रहते ले काग़ज़ कलम गलियों और रस्ते
🙏😌इरा जौहरी😌🙏
२०)दस्तक दी काग़ज़ पे पैगाम लिखा पर हवा के इक झोंके ने सब उड़ा दिया
काश इंटरनेट से पैगाम भेजा होता झटपट मिला होता और हम तुम्हारे होते
इरा जौहरी
२१)दिल जिसपे आये जरूरी नही कि उसे कभी देखा ही हो
कभी कभी मोहब्बत भरी लेखनी भी कमाल कर जाती है
🖌🖌इरा जौहरी🖌🖌
२२)इन हसरतों को यूँ ही मचलने तो दो जज़्बातों को थोड़ा बहकने तो दो
काग़ज़ पर लिखे दिल के पैगाम से अंजाम ऐ मुहब्बत परवान चढ़ने तो दो
इरा जौहरी
२३)धड़कनों मे मेरी हो तुम लिखा तो था काग़ज़ के पैगाम पे
मिला नही क्या वह अभी ,जाती हूँ फिर आऊँगी मक़ाम पे
इरा जौहरी
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