मुहब्बत समझाई नहीं जाती
मुशायरा
१ ) मोहब्बत ऐसी शय है जो समझाई नही जाती
यह जुबान से भी कह कर बतलाई नही जाती
इरा जौहरी
२ )मुहब्बत का यूँ सरेआम इकरार नही करते
चाहतें है जिसे हमेशा इज़हार नही करते
इरा जौहरी
३ )ख़ुद को समझ लिया जिस दिन ये दिल किसी को ना दे पाओगे
कहे “इरा “कि खुद से अधिक प्यार क्या किसी और से कर पाओगे
इरा जौहरी इरा
४) ये मरने की कस्मे ये जीने के वादे ना कर ए दोस्त
ये मोहब्बत तो अमर होती है बस तू सलामत रहे
इरा जौहरी
५) समझ समझ का फेर है अजी!जो ना समझे उसे कैसे समझाये ,
कहे “इरा “कि मोहब्बत की समझ का भेद कोई समझ ना पाये ।
इरा जौहरी
६)वह इंसान ही क्या जिसने कभी मोहब्बत ही ना की हो
वह दिल ही क्या जो किसी के प्यार मे धड़का ही ना हो
इरा जौहरी इरा
७) देखो समझो और जानो हमारी मासूम मुहब्बत को
हम दीवाने हो कर खुद में तुमको ही ढूँढा करते है
इरा जौहरी
८) यह दिल की लगी है दिल्लगी तो नही
यह इश्क मोहब्बत है दिल जला तो नही
इरा जौहरी इरा
९) चलो सुनाती है “इरा “ नगमा इक प्यार भरा
समझो तो मोहब्बत रहती सदा माँ की गाई लोरी मे
इरा जौहरी इरा
१०)समझो कि दिल उसके लिये था ही नही
जिसको इस दिल की क़दर ही ना थी
इरा जौहरी इरा
११) नज़र लगने से ही जो कुछ होता चलो मिल कर दुश्मन देश को नज़र लगाये
कहे” इरा “रोज रोज शहीदों की होती क़ुर्बानी पर चलो मिल कर रोक लगाये
इरा जौहरी
१२)प्रेम तो सूरदास जी का भी था
जो देखे बिना अमर हो गया
इरा जौहरी
१३) मुहब्बत जो तेरी मिल जाये सनम
खुद को खुदा ना समझ बैठे हम
इरा जौहरी
१४)किसी को चाहने के लिये कुछ किया नही जाता
बस दिल मिलतें है” इरा “ कि इश्क हो जाता है
इरा जौहरी
१५) गर इश्क ना हो जमाने मे
डूबे रहे सब दिल जलाने मे
इरा जौहरी
१६) मासूम दिल की धड़कन कहती है कि इश्क वह सदा है
जो देखे बिना किसी को महसूस करके भी हो जाती है
इरा जौहरी
मेरी मोहब्बत /
१३/७/२०१८


