गजल/गुड़िया रानी

❆ ग़ज़ल सृजन –

❆ काफ़िया (तुकान्त) – आनी

❆ रदीफ़ (पदान्त) – क्यों है

❆ तिथि – 30 जनवरी 2019

❆ वार – बुद्धवार

गुड़िया रानी तू इतनी सयानी क्यों है ,

 बनती बातों मे सबकी नानी क्यों है ।

दादी नानी से सुनी परियों की कहानी ,

अब भी लगती  इतनी सुहानी क्यो है ।

देख नभ में उड़ते पक्षी पवन और बादल ,

सोंचती जिन्दगी इनकी यूँ रुहानी क्यों है ।

बीता बचपन और जवानी अब है बुढ़ापा ,

तेरी बाते अब भी इतनी बचकानी क्यो है ।

नही जानती अनजाने मे किये थे क्या गुनाह ,

“इरा”की जिन्दगी में इतनी परेशानी क्यों है ।

इरा जौहरी 

लखनऊ 

मौलिक

#सम_तुकान्त_के_उदाहरण – जानी, पहचानी, बर्फानी, तूफानी, सयानी, कहानी, बनानी, नूरानी, ज्ञानी, छानी, जलानी, पानी, दीवानी, लिखानी, बहानी, चलानी, रचानी, ख़ानी, भुलानी, लिखवानी, सुनवानी, सुनानी, पढ़ानी, पढ़वानी, लहरानी, सुहानी, रानी, जवानी, फानी, लानी, मनानी, मनवानी, अपनानी, बचकानी, बहकानी, नानी, लानी, सतानी, सानी, रूहानी, रूमानी, हटानी, भिजवानी, बेईमानी, रंगवानी, तड़पानी इत्यादि अनेकों क्वाफ़ी शब्द।

❆ ग़ज़ल सृजन – 52

❆ काफ़िया (तुकान्त) – आनी

❆ रदीफ़ (पदान्त) – क्यों है

❆ तिथि – 30 जनवरी 2019

❆ वार – बुद्धवार

गुड़िया रानी तू इतनी स्याही क्यों है ,

 बनती बातों मे सबकी नानी क्यों है ।

दादी नानी से सुनी परियों की कहानी ,

अब भी लगती  इतनी सुहानी क्यो है ।

देख नभ में उड़ते पक्षी पवन और बादल ,

सोंचती जिन्दगी इनकी यूँ रुहानी क्यों है ।

बीता बचपन और जवानी अब है बुढ़ापा ,

तेरी बाते अब भी इतनी बचकानी क्यो है ।

नही जानती अनजाने मे किये थे क्या गुनाह ,

“इरा”की जिन्दगी में इतनी परेशानी क्यों है ।

इरा जौहरी 

लखनऊ