गर्भपात
चित्र पर आधारित लघुकथा
“गर्भपात”
“गर्भपात कराना क़ानूनन जुर्म है अजन्मे बच्चे को मारने का अधिकार किसी को नहीं है ।“यह कहते हुये सामूहिक बलात्कार की शिकार नलिनी के गर्भपात कराने के फ़ैसले को सुन सभी इंसानियत को बचाने के दावेदार क़ानून की पुस्तक खोल कर खड़े हो गये और उसे गर्भपात कराने से मना करनें लगे।
“ हैवानियत से किये गये दुराचार के फलस्वरूप नफ़रत के बीज से उत्पन्न सन्तान को किस तरह मैं प्यार की खुराक दे कर सही संस्कार दे पाऊंगी ।जब भी इस पर मेरी निगाह जायेगी वही मंज़र आँखों के सामनें घूम जायेगा ।क़ानूनन चाहें गर्भ गिराना गलत ही क्यों न हो जिन्दगी भर मर मर के जीने से बेहतर दुष्कर्म के बीज को पौधा बनने से पहले ही नष्ट कर देना है ।”।
इतना कहते हुये वह हाँफने लगी और क़ानून के दावेदारों के साथ समाज पर ऊँगली उठाते हुये आगे कहनें लगी “इसके जन्म लेनें के बाद जो लोग आज मुझे गर्भपात कराने के लिये मना कर रहे हैं क्या इसके साथ सामान्य व्यवहार कर पायेंगे और क्या आगे चल कर मुझसे विवाह करने वाला इस बच्चे को भी सहज रूप में अपना पायेगा ।यह समाज दुष्कर्म करने वालों को तो कुछ समय बाद माफ़ करके नयी जिन्दगी जीने देता है। जबकि जिसके साथ दुष्कर्म होता है उस पर ऊँगली उठा कर जीने नही देता ।और न ही उस दुष्कर्म से उत्पन्न सन्तान को सहज जीवन मिल पाता है ।इसी लिये जीवन पर्यन्त मिलने वाले अनजाने दुख से बचनें के लिये मुझे आज यह गर्भपात कराने का फैसला करना पड़ रहा है ।”
इरा जौहरी
(नलिनी की बात सुननें के बाद बुद्धिजीवियों के पास कोई उत्तर न था ।आपके पास हो तो बतायें ।
लघुकथा /गर्भपात
२३/९/२०१९

