घनघोर घटा उमड़ कर मचा रही यह कैसा मंथन ओ साथी
❆ शब्द सीढ़ी –
❆ तिथि – 07 जून 2018
❆ वार – गुरुवार
❆ शब्द – मंथन, कथन, चिन्तन, सृजन, हनन
घनघोर घटा उमड़ कर मचा रही यह कैसा मंथन ओ साथी ।
दिल में मेरे भी चल रहा जाने कैसा यह #मंथन ओ साथी ।
टूटा दिल उसी दिन देखा जिस रोज वह दर्दनाक मंज़र ऐ हमदम ।
चुभा था तभी दिल में तीर सा उस रोज का वह #कथन ओ साथी ।।
सर्द रातों की तनहाइयो में अब हमें याद कर ना अपना दिल दुखाना ।
तुम्ही को सोंच बेताबी से करती रहती दिन रात मैं #चिन्तन ओ साथी ।।
सागर किनारे मचलती लहरें छोड़ जातीं हैं जो गीली रेत कुछ यादो सी ।
बनाया है एक घरौंदा उसी पर देखो कैसा है मेरा यह #सृजन ओ साथी ।।
सुख दुख हैं जीवन साथी रहे सदा संग तेरे मेरे कभी ना हारना हिम्मत तुम ।
कहे “इरा “जीवन है कर्मक्षेत्र करना ना कभी मेरे मान का #हनन ओ साथी ।।
इरा जौहरी
लखनऊ
.शब्द सीढ़ी :मंथन ,कथन ,चिन्तन ,हनन
७/६/२०१८


