जानें कहाँ गये वो दिन !!!! तीसरा भाग
जाने कहाँ गये वो दिन
हमारी चौथी रचना
जिन्दगी में बीता समय कभी लौट कर नहीं आता ,आता है तो हमेंशा कुछ नया ही आता है अगर बीता हुआ ही वापस आता जाये तो जीवन जीने का मक़सद ही समाप्त हो जायेगा । कुछ नया और अच्छे की चाह ही हमेशा करने की प्रेरणा देती रहती है ।बचपन से बड़े होने तक का सफर स्कूल से कॉलेज तक का तय कर के फ़ैज़ाबाद से लखनऊ और लखनऊ में लखनऊ विश्वविद्यालय तक पँहुचने के बारे मे यदि ज़िक्र ना किया तो लगेगा बहुत कुछ छूट गया स्कूल कॉलेज के बन्धन वाले नियम क़ायदों के बन्धन से आज़ाद होकर विश्व विद्यालय मे पँहुचना एक अलौकिक आनन्द देने वाला अनुभव रहा ।सच मायने मे वहाँ जाकर पता चला परिन्दों की तरह उड़ने का मजा क्या होता है ,और उन सबके बीच हमारे प्रिय विषय नृतत्व यानी नृविज्ञान के शिक्षक बिना नागा नियम पूर्वक कक्षाये लेते थे और यदि किसी दिन कोई अकेला भी बैठा हो तो गुरुजी उसको ही पढ़ा देते थे ।कहने का आशय यह इस वजह से हम लोग कभी भी कोई कक्षा छोड़ते नहीं थे आज के समय पता नही वैसे शिक्षक भी होंगे आज भी हमारे दिलो मे उनके लिये पूरा सम्मान है अब जब विश्वविद्यालय का ज़िक्र किया है तो जब तक एम ए नृतत्व मे होने वाले टूर का ज़िक्र ना किया जाये मजा अधूरा रह जायेगा नृविज्ञान यानी मनुष्य की जानकारीदेने वाला विज्ञान ,तो एम ए द्वितीय वर्ष मे जनजातियों के अध्ययन के लिये हम लोग बिहार के पास ब्राम्बे नाम के गाँव मे गये थे जहाँ बिताया गया महीने भर का समय भी जीवन मे अविस्मरणीय यादे छोड़ गया है आज जब लिखने बैठी तो वहाँ बिताया एक एक पल एसा लग रहा है जैसे कल की ही बात हो अब नही लगता फिर कभी उन सहपाठियो और गुरुओं से कभी जीवन मे मुलाक़ात भी होगी जानें कहाँ गये वो कभी ना लौट के आने वाले दिन
वहाँ गाँव मे जनजातीय आदिवासियों के विवाह के समारोह मे शामिल होने के समय को तो हम कभी नहीं भूल सकते हम सात लोग रात के समय वहाँ गये थे चाँदनी रात थी चारों तरफ सन्नाटा था हम सब एसे मे खेतों के रास्ते से वहाँ गाँव मे पँहुचे थे और उनके साथ विवाह समारोह मे होने वाले आदिवासियों के नाच मे भी उनका साथ दिया था खूब जम कर उनकी तरह ही नृत्य करके बहुत मजा आया था
और वह हमारा जो लौटने वाला दिन था जहाँ हम ठहरे थे वहाँ रहने वाले बच्चों से हमने दोस्ती कर ली थी सभी बहुत उदास हो गये थे उन्होने हमसे हमारे पते ले कर अपने पते दिये जिन पर हमने बहुत समय तक अपनी गुरू जी की सलाह पर पत्राचार भी किया क्योकि ये आदिवासी बहुत ही सीधे व सरल होते है अगर हम एसा नही करते तो उनके दिल टूट जाते
विश्वविद्यालय ने मुझे दो एसी अनमोल सहेलियाँ दी जो जीवन भर की सखा हो गयी आज वो हमसे दूर जरूर हैं पर दिल के करीब है आज भी दिल करता है उनका साथ हो और हम फिर से विश्वविद्यालय के प्रांगण में बैठ कर गप्पे मारे विश्वविद्यालय छूटा माता पिता ने विवाह करके ससुराल भेज दिया सब बदल गया जब मायके लौटी सबकुछ वैसा ही था पर पता नहीं क्यूँ सब बदला बदला महसूस होता था शायद सभी लड़कियां जीवन मे एसा ही महसूस करती हैं विवाह के बाद एक नया जन्म नया परिवेश जीवन की धारा ही बदल जाती है लड़की से वह एक औरत बन जाती है सभी की आशाये बढ जाती है और उसे कोई उसका ख़ास ख़्याल रखने वाला मिल जाता है वह समय यदि सुख भरा होता है कोई भी बीते दिनो मे लौटना नहीं चाहता पर आगे के जीवन मे दुखद पल आते ही दिल कहने लगता है जाने कहाँ गये वो दिन
सुख के बाद दुख और दुख के बाद सुख समय का पहिया निरन्तर चलता रहता है बस किसी के जीवन मे सुख के दिनों मे रथ की गति धीमी या रुक जाती है तो किसी के जीवन मे दुखो की ।
सुखों मे तो समय जैसे पंख लगा कर उड़ जाता है जबकि दुख के दिन लगता है बीतते ही नहीं है हर वक्त यही लगता है कि जानें कहाँ गये वो सुख भरे दिन
पर समय तो अपनी गति से चलता ही रहता। है निरन्तर अनवरत
इरा जौहरी



