पार्टी का पैसला
लघुकथा
पार्टी का फैसला
चुनाव में बुरी तरह हारनें के बाद हारने वाली पार्टी के लोग मुँह लटकाये बैठे हुये थे ।बड़े नेता हार के कारणों को खोज रहेथे और छुटभैया दिमाग़ी घोड़ों को दौड़ाते हुये अपने विचारों को पर्चियों मे उतार कर आगे पँहुचा रहे थे ।कुछ समझ मे नही आ रहा था कि जीत के लिये आगे क्या किया जाये ।दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है इस सिद्धान्त पर चलते हुए उन लोगों ने यह फ़ैसला किया कि अबकी बार हम सब मिल कर एक संगठित पार्टी बनायेगे और मिल कर विजयी पार्टी को हरायेंगे ।और सबने मेज थपथपा कर एक साथ पार्टी के फ़ैसले को स्वीकार कर लिया ।
इरा जौहरी
लघुकथा /पार्टी का फ़ैसला
७/७/२०१८

