बड़ी मौसी
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लघुकथा
बड़ी मौसी
मौसी और बहनौतिन का रिश्ता बहुत करीब होता है कुछ इत्तफ़ाक़ रहा कि नीला की ससुराल के पास ही उसकी बड़ी मौसी नें रहने के लिये घर ख़रीद लिया । अब तो नीला के पंख लग गये माँ ना सही मौसी तो पास आ गयी थी रहने के लिये एक तरह से दूसरा मायका पास आ गया था और कुछ एसा हुआ कि बच्चो के नाम जिस स्कूल मे लिखाने गये वो भी मौसी के घर के करीब था अब नीला के पंख लग गये जब तब मौसी से मिलने उनके पास आ जाती मौसी भी खुश । एक दिन वह जो मौसी के पास पँहुची तो मौसी पहले तो उसे बड़े प्यार से दिखाने लगी कि देखो हमने ये लड्डू बनाये है और एक लड्डू कतो उसके मुँह मे ही डाल दिया। फिर अचानक ही बोली पता नही क्यो सीने मे दर्द हो रहा है जरा सहला दो और सबके लिये खाना भी बना दो । नीला ने खाना बनाया और मौसी के सीने मे दवा लगा कर सहला भी दिया और फिर अपने घर वापस आ गयी अगले दिन छुट्टी थी तो रात मे अपने मायके माँ के पास भी चल दी तभी ख़बर आई कि मौसी को तो हार्ट अटैक पड़ा था और वो अस्पताल मे भर्ती हैं मौसी की छोटी बहन यानी नीला की माँ को लेकर नीला के पति अस्पताल पँहुचे वहाँ जैसे वो अपनी छोटी बहन का ही इन्तजार कर रही थी बहन ने उनका सिर गोद मे लिया और मौसी ने बहन की बाँहों मे ही दम तोड़ दिया ।आज भी वह घर है घर के लोग हैं पर मौसी नहीं है । नीला को अपनी मौसी आज भी याद आती है ।
इरा जौ
बड़ी मौसी
१८/५/२०१८

