भाई से प्रथम मिलन
*संस्मरण –
* तिथि – 17 जुलाई 2018
*वार – मंगलवार
*शीर्षक-“भाई से प्रथम मिलन “
आज जब जीवन का यादगार संस्मरण लिखने की बात कही गयी है तो मुझे याद आती है वह रात जब हम अपने प्यारे भाई से जीवन में पहली बार मिले थे ।
मेरी ननिहाल कानपुर के पास बिल्हौर मे है ।भाई के जन्म के समय माँ बीएड कर रही थी इस लिये मुझे अम्मा यानी नानी के पास छोड़ दिया था ।करीब साल भर मै अम्मा के ही पास रही ।ननिहाल मे जब भाई के जन्म की ख़बर पँहुची बाबू मुझे गाँव की हाट ले कर गये और खूब सारे खिलौने दिलवाये ।
यहाँ मै यह बता दूँ कि हम लोग नाना जी को बाबू कहते थे ।मुझे याद है छोटी सी बकसिया भर के खिलौने थे ।पापा हमे लेने आये थे ट्रेन से सफर तय करके हम प्रतापगढ जंक्शन (अवध)पँहुचे ।और फिर वहाँ रेलवे लाइन के किनारे बसे रेलवे क्वार्टर मे पँहुचे जहाँ हमारा नन्हा भाई माँ के साथ हमारा इंतज़ार कर रहा था ।
वह पल हमारे लिये अविस्मरणीय था जब हम पहली बार अपने छोटे भाई से मिले ।रात का समय था ।बिजली चली गयी थी तो घर में कुप्पी जल रही थी उसी की रोशनी मे हमनें पहली बार अपने भाई को देखा था ।मै भी नन्ही सी ही थी और भाई के लिये जो खिलौने ले गयी थी बकसिया खोल कर सब उसे उसी अंधेरे मे दिखाने लगी ।
अब जब बीती बातें याद करती हूँ तो हँसी आती है ।और दूर परदेस मे रह रहा भाई भी बहुत याद आता है कितना खूबसूरत था वह बचपन ।अब ना बाबू है और ना अम्मा ।उनके साथ बिताये गये बचपन की खूबसूरत यादो का पिटारा अगले संस्मरण मे खोलूँगी ।
इरा जौहरी
स्वरचित
भाई के जन्म के समय का संस्मरण
१७/७/२०१८

