लेख/एक विचार
लेख
आज के समय में एक विचार
अच्छे पाठक होने का जहाँ तक सवाल है तो हर वह व्यक्ति अच्छा पाठक हो सकता है जो काग़ज़ की पुड़िया भी पढ़ने का मोह ना छोड़ सके ।साथ ही यह भी सही है कि हर व्यक्ति अपनी अभिरुचि के अनुसार ही पठन पाठन करता है ।जबरदस्ती ना किसी से कुछ लिखवाया जा सकता है ना पढ़वाया ।बल्कि मैं तो कहूँगी जबरदस्ती किसी से कोई काम नही कराया जा सकता है ।
समाज के हितार्थ तो बहुत कुछ होना चाहिये पर यदि सब सही हो तो दुनिया स्वर्ग ना बन जाये ।मीठे के संग नमक भी शरीर के संतुलन के लिये जरूरी होता है पर मात्रा सभी अपने हिसाब से ही लेते हैं ।क्या करना है और क्या नही इसके पैमाने भी हर व्यक्ति को खुद ही तय करने होते है ।जैसे बाजार मे हर तरह का भोजन उपलब्ध है पर खाते हम अपनी रुचि के अनुसार ही हैं उसी तरह इस फेसबुक पर भी हर तरह का साहित्य उपलब्ध है पर हमे क्या पढ़ना है यह भी हमे ही तय करना है ।जैसे जिसको जो रचना करनी है करे हमे जो ठीक लगे पढ़ें और प्रतिक्रिया दे।
एक बात और किसी विधा में बंध कर यदि रचना करनी है तो जरूरी है कि उस विधा के विषय में पूरी जानकारी ली जाये वरना यदि स्वतन्त्र सृजन करना हो तो जरूरी नही कि पहले कुछ लोगो को पढ़ने के बाद ही सृजन किया जाये ।जितने नामी गिरामी काल जयी रचनाकार हुये हैं वो अपनें मन की राह पर चलें है ।अनुगमन तो दूसरों ने उनका किया है ।पथ प्रशस्त करने वाला राह पर पहले खुद अकेला ही चलता है ।क़ाफ़िला तो बाद मे उसके पीछे पीछे चला करतें हैं ।
इरा जौहरी
मौलिक
लेख / मेरे विचार
६/२/२०१९
