शतरंज सी है जिन्दगी
❆ काव्य सृजन – 182
❆ विषय – शतरंज सी है ज़िन्दगी
❆ तिथि – 04 जून 2018
❆ वार – सोमवार
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जीवन की बिसात पर पसरी हुई अल्लहड़ सी जिन्दगी ।
पल में हँसाती तो कभी रुलाती शतरंज सी है जिन्दगी ।।
ऊँची पर्वत माला से गिर कलकल धारा सी तरंगित बन्दगी ।
फूलों की तरह हँसती कभी मुस्कुराती शतरंज सी है जिन्दगी ।।
आवारा बादल बन ठुमक कर मौजो की मस्तानी सी लहराती ।
मेघों की बारिश में आँसू सी बह निकलती शतरंज सी है जिन्दगी ।।
जीवन के चक्रव्यूह मे सुबह शाम उलझे धागों सी ज्यूँ बिखरती ।
कभी सुलझती और कभी उलझती जाती शतरंज सी है जिन्दगी ।।
शतरंज की बिसात पर ढाई घर घोड़ा चले ,हाथी की सीधी चाल ।
राजा वज़ीर ऊँट और प्यादा के चालों वाली यह शतरंज सी जिन्दगी ।।
सीधे रास्तो पर टेढ़ी चाल चलने के लिये भी मजबूर कर देती है कभी ।
सुख दुख के खानों वाली भावुक हृदय “इरा “की शतरंज सी जिन्दगी ।।
इरा जौहरी
लखनऊ
शतरंज सी है जिन्दगी
४/६/२०१८


