शब्द सीढी / – गाँव, चौपाल, खेत-खलिहान, पनघट, चूल्हा
❆ शब्द सीढ़ी -काव्य
❆ तिथि – 29 सितम्बर 2018
❆ वार – शनिवार
❆ शब्द – गाँव, चौपाल, खेत-खलिहान, पनघट, चूल्हा
“आज फिर वो भूली बिसरी सी #गाँव की याद आ गयी ,
मन में एक बचपन की कुछ सुहानी सी बातें याद आ गयी ।
बिताते थे जब बचपन गर्मी की छुट्टियाँ अपनी नानी के घर,
यादों मे बसा आज भी है वो घर,बरौठा ,आँगन, व# चौपाल।
उड़ते परिन्दे बन दौड़ते जाना दूर हरे भरे #खेत_खलिहानों में ,
सुनाई देती हैं आज भी रहट की आवाज़ें यादों के गलियारो में ।
वो बचपन की नन्ही नादानियाँ गहरा कुआँ और वो #पनघट ,
मिट्टी के घड़े और उनका शीतल पानी तृप्त हो जिससे आत्मा।
नहीँ भूलती नानी के घर की रसोई जिसमें था मिट्टी का #चूल्हा ,
फुद फुद पकती उर्द की दाल और सोंधी खुशबू मोटी रोटी की।
खेतों से आना वो ताज़ी सब्जियों का फलो से लदे अम्बारों का ,
दली जाती थी मक्का मूँगफली घरों मे ही गाते हुये गुनगुनाते हुये।
खूबसूरत यादों की तस्वीर सजी मन में जैसे हों कल की ही बात ,
नही भूलेगी कभी “इरा” वो बचपन और वो पतली संकरी गलियाँ।
इरा जौहरी
स्वरचित
काव्य /शब्द सीढी / गाँव, चौपाल, खेत-खलिहान, पनघट, चूल्हा
२९/९ /२०१८/

