संवाद लेखन
❆ संवाद-लेखन – 1
❆ तिथि – 4 फरवरी 2019
❆ वार – सोमवार
❆ विषय -माँ और पुत्र (नौकरी का पहला दिन)
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मोबाइल की रिंगटोन बजती है स्त्री फोन उठाती है वीडियो कॉल शुरू होती है ।बेटे को खुश देख कर माँ कहतीहै
माँ – हैलो बेटा कैसे हो । बड़े खुश नजर आ रहे हो
मोबाइल पर बेटे का स्वर – माँ आज मैं बहुत खुश हूँ मैने अपनी ड्रीम जॉब पा ली है ।मेरा बॉम्बे स्टाक एक्सचेंज के ऑफ़िस में मेरा सलेक्शन यानी चुनाव हो गया है ।मै बहुत खुश हूँ ।एक महीने के अन्दर मुझे नयी नौकरी मे ज्वाइन करने जाना होगा ।
माँ -तुम्हारी सफलता से मै भी बहुत खुश हूँ ।मै कहती थी ना कि ईश्वर के यहाँ देर है पर अन्धेर नहीं ।तुम ईमानदारी से मेहनत करते रहो सफलता जरूर तुम्हारे कदम चूमेगी ।और हाँ सफलता की सीढी चढ़ते हुये नीचे की तरफ देखना मत भूलना ।कभी गुरूर मत करना ।
बेटा – अब आज तो मुझे नीद नहीं आने वाली पता नहीं क्यूँ मुझे बहुत रोना आ रहा है ।
माँ – बेटा ये खुशी के आँसू है इन्हे बह जाने दो ।
बेटा – माँ मेरे पास कोई नही है मै किसके साथ अपनी खुशी बाँटू समझ नही आ रहा ।
माँ -बेटा मैं हूँ ना चाहे जितनी देर और जब तक चाहो मुझसे बात करो ।
(माँ बेटे के बीच वैसे तो रोज ही बात होती है पर नौकरी के पहले दिन की बात -एक माह बाद दिन भर बाद शाम के समय फिर फोन बजता है )
माँ -हैलो बेटा कैसा रहा आज का दिन
बेटा – बहुत बढिया मुझे वहाँ बहुत ही अच्छा लगा ।देखना माँ एक दिन तुम्हे अपने बेटे पर गर्व होगा ।
माँ – बेटा मुझे तो आज भी तुम दोनो पर बहुत गर्व है दोनो ने अपनी मेहनत के बल पर अपने सपनो को पूरा किया है ।बस ईश्वर दोनो को बुरी सोहबत से बचाये रखे और कभी भी दोनो पर अपनी वक्र दृष्टि ना डाले ।दोनो ही सदा उन्नति के पथ पर बढते जाओ हमारी शुभकामनायें दोनो के साथ है ।सदा खुश रहो
तुम थक गये होगे जाओ खाना खा कर आराम करो फिर कल नयी सुबह तुम्हारा इन्तजार भी तो कर रही है ।अच्छा शुभ रात्रि ।
बेटा -अच्छा माँ शुभरात्रि ।माँ यहाँ सब कुछ मिलता है बस तुम्हारे हाथ का खाना नही मिलता ।अब मै जल्दी से एक घर ले लूँगा और तुमको अपने पास ले आऊँगा ।
माँ – अरे बेटा आऊँगी आऊँगी फिलहाल अभी तो जाओ और कल सुबह जल्दी उठ कर काम पर जाने के लिये खाना खा कर सो जाओ ।
इरा जौहरी
मौलिक

