संस्मरण -वह रात
❆ संस्मरण -वह रात
❆ तिथि – 12 जून 2018
❆ वार – मंगलवार
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.जीवन में बहुत सी घटनायें होती रहतीहैँ और वो मन मस्तिष्क में अपनें संस्मरण अच्छी व बुरी यादों के रूप मे छोड़ जातीं है कुछ ऐसा ही संस्मरण लिखते समय आँखों के सामने घूम गया जो जिन्दगी और मौत के बीच का हमें दर्शन करा गया । घटना करीब बाइस साल पुरानी है । हमारे श्रीमान जी की तबियत ठीक नही चल रही थी । रोग अपनी भयावकता के कारण नियन्त्रण मे नहीं आ रहा था ।चिकित्सक औषधि की मात्रा बढाये जा रहे थे । हम कभी चिकित्सक के पास दिखाने जाते थे तो कभी फोन द्वारा ही सलाह ले लिया करते थे । रोग के बारे मे ज्यादा नही समझते थे पर रोगी के साथ रहते हुये रोग के बारे मे बहुत कुछ समझने लगे थे । रात के समय अचानक ही ये बदहवास होकर गिर पड़े । बिस्तर पर इन्हे लिटाया गया ।अचानक मुँह से ख़ून आने लगा ।हमारे घर मे सभी कमज़ोर दिल के मालिक हैं । इनके बड़े भाई जिनके साथ हम लोग रहते थे वो एकदम से घबड़ा गये जिठानी का भी घबराहट के मारे बुरा हाल था वो हमारे दोनो बच्चो को अलग कमरे मे ले गयी । जेठ दादा पास ही बड़े जेठ के साथ रह रही सासूमाँ को ले कर चले आये ।किसी को कुछ समझ नही आ रहा था कि क्या करें ।उन दिनो घर मे फोन की सुविधा नहीं थी पी सी ओ जाना पड़ता था रात के दस बज रहे थे । इनकी हालत देख कर सासू माँ घबड़ा गयीं और बोली जाओ भगवान के आगे दीपक जला आओ और ठीक होने की प्रार्थना करो ।मै यह सुन कर पत्थर सी जड़ हो गयी दिमाग सुन्न हो गया ।मै एकदम से बाहर भागी और पड़ोस मे रहने वाली भाभी जी जिनके घर मे फोन की सुविधा थी उनका दरवाज़ा खटखटाया और उनसे इनका हाल बता कर चिकित्सक से बात करने की इजाज़त ले कर हमने बात की तब उन्होने पास मे ही रहने वाले उनके शिष्य चिकित्सक के बारे मे और एक विरोधी दवा का इंजेक्शन बताया कि उनसे वह लगवा ले तबियत में सुधार आ जायेगा । हम फौरन भाग कर घर गये दादा इंजेक्शन व चिकित्सक को लेकर आये । चिकित्सक ने आकर इंजेक्शन लगाया और ये फिर गहरी नींद मे सो गये । हमारी सासूमाँ और हम दोनो ही इनके पास रात भर सोते जगते रहे ।सुबह तक तबियत मे सुधार आ गया था ।बाद मे लम्बे समय तक इलाज चलता रहा पर दिया जलाने की बात सुनते ही हमें एसा लगा कि अन्तिम समय आ गया है ।जीवन मे घंटा यह संस्मरण ना मै और ना ही घर का अन्य कोई सदस्य कभी भुला सकता है।कभी कभी लगता हैकुछ लोगो के जीवन में कुछ ज्यादा ही इस तरह की घटनाये होती है ।
इरा जौहरी
लखनऊ
संस्मरण
वह रात
12/6/2018

