सरगोशियाँ
(६३,६४)
मुशायरा
अर्ज किया है
मुशायरा
सुन सरगोशियाँ तुम्हारे आगमन की
मचल उठा मन तुन्हारे मिलन को
इरा जौहरी
आओ न चुपचाप बैठे हम कुछ तुम कहो कुछ हम कहे
यूँ ही सरगोशियो मे बहक कर कुछ ख़्वाब सजाया करे
इरा जौहरी
नीले अम्बर पर जो आसमानी ख़्वाब छाये
मन गुनगुनाने लगा सरगोशियां छाने लगी
इरा जौहरी
तेरी क़ातिल निगाहों ने कर दिया मुझको घायल
मधुर सरगोशियाँ तेरी बना देतीं हैं मुझको पागल
इरा जौहरी 🌼😴
सरगोशियाँ तेरी दे जातीं है, मुझे एक ख़ुशनुमा एहसास ।
होतीं हूँ जब अकेली लगता है ,तुम हो कही आस पास ।
इरा जौहरी
यह दिल भी बड़ा अजीब है ,ख़्वाब मे भी सुनता है ,अनसुनी सरगोशिया तेरी।
ख्वाबों मे रोज इन्द्रधनुष सजाता है मिलन के , चाहे मिल ना पाये कभी भी
इरा जौहरी ।
भँवरों के गुंजन से खिलती कलियो की मुस्कान प्यारी
कोयलिया की कुहुक याद दिलाती सरगोशिया तेरी
इरा जौहरी
मुशायरा


