सहारा पेन्शन का !!
लघु कथा
सहारा पेन्शन का
सखि मंजरी के पति की मौत की ख़बर सुन कर मृदुला सन्न रह गयी परिस्थिति वश जब लम्बे समय बाद उससे मिलने उसके घर गयी तो सबसे पहले उसके ससुर से मिलना हुआ जो बाहर पौधों मे पानी डाल रहे थे ।
अन्दर जाते समय दरवाज़े के बाहर से ही सास के निरन्तर बड़बड़ाने की आवाज आ रही थी ।अन्दर पँहुच कर उनको नमस्ते करके सखि के बारे मे पूँछा तो उन्होने ऊपर कमरे की तरफ इशारा कर दिया और अपने पास ही बिठा कर उसके हालचाल लेने लगी और उससे बोली कि “उनके जीवन का कोई भरोसा नही पके फल है कब क्या हो जाये वह अपनी सखि को समझाये कि वह अब उनकी चिन्ता छोड़ कर शादी करके घर बसा ले “।
तभी ऊपर का दरवाज़ा खुला और एक युवक वहाँ से निकल कर सीढ़ियों से उतर कर बाहर चला गया ।
सास के इशारा करने पर वह ऊपर चली गयी ।सखि के लिये जो सहानुभूति वाला भाव वह लेकर वहाँ आई थी एक पल मे खत्म हो गया ।सखि से वह बोली” यह सब क्या है अगर तुम उसको इतना ही चाहती हो तो शादी क्यूँ नही कर लेती” ।
यह सुन मंजरी की आँख भर आई बोली “कहते तो रितेश भी हैं कि शादी कर लो हम मिल कर दोनो का ख्याल रख लेंगे पर सच बताओ एक विधवा को जो सरकारी मदद मिलती है उसके शादी कर लेने पर क्या मृतक के बूढ़े माता पिता को मिलेगी ।अब उनकी कमाई का कोई ज़रिया नहीं है अगर मैने शादी कर ली तो वो आत्मसम्मान के साथ जी भी नही पायेंगे तो अब उनका जितना जीवन है अपने बेटे की पेन्शनके साथ चैन से जिये इसके लिये जरूरी है कि मै शादी ना करूँ पर मुझे भी सहारा चाहिये वह मुझे रितेश से मिल जाता है “।
मृदुला अब सोंच रही थी कि किसको क्या समझाये । इस विकट परिस्थिति में क्या सही होगा क्या कोई बतलायेगा ।
इरा जौहरी
स्वरचित
सहारा पेन्शन का
१५/७/२०१८

