सुई धागा
❆ काव्य सृजन
❆ विषय – सुई धागा
❆ तिथि – 24 सितम्बर 2018
❆ वार – सोमवार
:
#सुई_और_धागा से मिलती सीख ,
आपस में बिछुड़े गले लगाते कैसे।
कच्चे टाँको से जोड़ पुराने कपड़ों को ,
बना सुन्दर कथरी देती नया जीवन सुई ।
पुराने रिश्तो को तुम मत देना फेंक ,
उनके अनुभव जोड़ते हमें जैसे सुई ।
कायस्थ औ कथरी का रिश्ता अनोंखा ,
खोजो तो जुड़े दिखते सम धागा सुई ।
उफ़ आह होती है “इरा”जब चुभ जाये सुई,
तो जरा सँभल कर चलाओ धागा संग सुई ।
इरा जौहरी
लखनऊ
मौलिक
काव्य/सुई धागा
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२४/९/२०१८

