छिल्के वाली मूँग की दाल की खिचड़ी !!!!!
देशी घी मे जीरा भून कर ऊपर से डाल कर बनाई गयी छिल्के वाली मूँग की दाल की खिचड़ी !!!!!!
पहले मन बदलने के लिये खूब अटपटा चटपटा खाया फिर हाज़मा दुरुस्त रखने के लिये मूँग की दाल की यह ढीली ढाली खिचड़ी बनाई साथ मे हाज़मा दुरुस्त रखने वाला चूरन बुकनू व मूली के मुलायम पत्तो को पीस कर बनी चुर्रीमुर्री भी है और दही बिना तो खिचड़ी का जायका अधूरा है तो वह भी है
Ira Johri जयपुर के राजवैद्य श्री मुक्ति नारायण शुक्ला जी द्वारा नानी माँ को बताया गया हाजमा दुरुस्त रखने वाले बुकनू का नुस्खा
1 हल्दी 100गृाम
2 सोंठ100 ”
3 जीरा50 ”
4 सौंफ 50 ”
5 अजवाइन 50″
6 हींग20 ”
7 छोटी हर्र 50 ”
8 बङी हर्र। 25″
9 बहेङा 25″
10 आँवला 25″
11 कांला नमक125″
12 पीपर25″
13 पिपरामूर 25″
14 सेधा नमक100″
विधि_1से लेकर 7 तक के मसालो को देसी
घी या सरसों के तेल मे भूने फिर। समस्त मसालो को एक साथ पीस कर बुकनू तैयार करे
भोजन के बाद रोज़ एक चम्मच बुकनू पानी के साथ या एसे ही भोजन के साथ खाने से हाज़मा दुरुस्त रहता है
रोटी पर देशी धी लगा कर या पराठे पर। एसे ही बुकनू लगा कर खाये हाज़मे के साथ स्वाद भी पाये
चाहे तो बुकनू मे नीबू का रस डाल कर चटनी की तरह भी आनन्द ले सकते है
खिचड़ी !!!
विधि
एक भाग दाल व दो भाग चावल ले कर बीन कर साफ पानी से धो कर नमक व पानी के साथ जरा से देशी घी मे हीग जीरा व मिर्च से छौंक लगा कर कुकर मे पकाये व स्वादानुसार ऊपर से देशी घी मे जीरा भून कर मिलाये
नोट मरीज़ के लिये बनाते समय जरूरत के अनुसार ही चिकणाई डाले
इरा जौहरी 
चुर्रीमुर्री !!!
मूली के मुलायम पत्तो को लहसन , अदरक , नमक डाल कर पीसे (हरीमिर्च एच्छिक है )
पीसने के बाद जरा सा सरसो का कच्चा तेल मिलाये
यह गैस ,अपच ,बदहजमी ,बबासीर मे फ़ायदेमन्द होता है




