सेब की जेली !!!

 

सेब की स्वादिष्ट जेली बनाइये घर मे हमारे स्टाइल से जो स्वास्थ्यवर्धक होने के साथ ही देखने मे भी मन को भाये और स्वाद भी जगाये

जेली !!!!!!!!!!!
जेली का खट्टामिट्ठा स्वाद बहुत ही बढिया लगता है इसे रोटी या डबल रोटीया कुकीज़ आदि पर भी लगा कर स्वाद लिया जा सकता है कहते है बालक बूढ़े एक समान तो हमारे बच्चों के बाबा इसे भोजन मे चटनी की तरह खाते थे और मन हो तो एसे ही चममच मे ले कर स्वाद लिया जा सकता है
जेली !!!!!!!!!!
जेली कच्चे और खट्टे फलो से बनती है
सेब करौदा सन्तरा आदि
पर अमरूद पका होना चाहिये
1 किलो फल पर 650 ग्राम से 750 ग्राम चीनी तक पङ जाती है
ंसबसे पहले फल को मोटे टुकङो मे काट कर फलो के बराबर पानी मे डुबो दे यानी बर्तन मे पानी इतना हो कि फल डूब जाये
बर्तन। धीमी आँच पर चढा कर फल को गलने तक पकाये
फल और गूदे के बीच मे मौजूद पैक्टीन नामक तत्व के कारण जैली जमती है इसलिये धीमी आँच पर ही पकाना चाहिये
पकाने के बाद कपङे सेछान कर हल्के हाथो से दबा कर रस निकाल ले अब चीनी मिला कर तेज आँच पर पकाये चीनी घुलने तक चलाते हुये फिर बिना चलाये पकाये ज्यादा चलाने से भी जेली जमती नही है जब रस गाढा होने लगे करीब 4 नीबू का रस डाले रस ज्यादा पहले ना डाले रंग खराब हो जाता है
रस पकाते समय ज्यादा चलाना नही चाहिये जेली के कण टूट जाते है फिर जेली बढिया नही जमती है
चमचे से रस उठा कर देखना चाहियेजब vआकार का रस चपकने लगे तैयार समझना चाहिये
इरा जौहरी
फल का छना हुआ रस और पैक्टीन टेस्ट !!!
धीमी ऑच पर फल गलाने से फल का पैक्टीन पूरी तरह से निकल आता है जेली पैक्टीन मे सही मात्रा मे चीनी के अनुपात से जमती है इसके लिये प्लेट टेस्ट किया जाता है एक प्लेट मे जरा सी स्पिरिट डाल कर किनारे से धीरे से जरा सा फल का रस डाले अगर जेली एक धक्के मे जम जाये तो ए ग्रेड और यदि छिटकी हुई हो तो बी ग्रेड और फैली हुई हो तो सी ग्रेड की जेली मे पैक्टीन की मात्रा समझनी चाहिये और चीनी भी उसी हिसाब से कम ज्यादा कर लेनी चाहिये ए ग्रेड मेंढक किलो फल पर साढ़े सात सौग्राम और बी ग्रेड मे उससे कम और सी ग्रेड होने पर उससे भी कम चीनी रखनी चाहिये चीनी ज्यादा होने पर जेली कड़ी हो जाती है उसे हार्ड जेली कहते है और चीनी की मात्रा कम होने पर जेली बहने लगती है उसे वीपिंग जेली कहते है
इरा जौहरी

 

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