काँजी बड़ा
काँजी बड़ा
और हमने होली से तीन दिन पहले काँजी बड़ा बना ही लिया अब लोग पर सब इसका रसास्वादन करेगे
हमने इस बार बड़े बनाने मे कुछ बदलाव कर दिया है तीन दिन बाद बतायेंगे कि कैसे बने हमने दही बड़े और खस्ता कचौड़ियाँ के लिये जो दाल पीसी थी उसी मे बेसन मिला कर कड़ा आटा करके इसी विधि से बड़े बनाये है एक और बात पारम्परिक तौर पर यह काँजी मिट्टी के कोरे घड़े मे बनाई जाती है अगर वही स्वाद व खुशबू आप बिना घड़े के पाना चाहे तो मिट्टी के एक दिये को साफ करके उसमे थोड़ा तेल डाल कर गैस पर गर्म करे और हीग जीरा डाल कर चटका कर काँजी के पानी मे छौक लगा कर वह मिट्टी का दिया उसी पानी मे डाल दे काँजी मे मिट्टी की खुशबू आ जायेगी
इरा जौहरी
कांजी बङा
बङा बनाने की विधि
उङद की दाल के आटे को पानी डाल कर कङा कङा गूंधे हथो मे तेल लगा कर खूब गूधे बरे के आकार का बना कर कांटे या चाकू से गोद देजिससे तलते समय बङे फूले नही फूलने पर मुलायम हो जायेगे और फूट जायेगे बङे तल कर ठंडे कर के कांजी के पानी मे डाल कर जाङे मे तीन दिन धूप मे बन्द ढक्कन के जार मे रखे और गर्मी मे छाया मे ।तीन दिन बाद अचार तैयार हो जाता है यह पेट के लिये बहुत फायदेमन्द होता है
कांजी बनाने की विधि व सामग्री
हींग 1/4 चम्मच
सोठ 1 चम्मच
जीरा पौन चम्मच
अजवाइन पौन चम्मच
हल्दी सवा चम्मच
राई ढाई चम्मच
लौग 4
बङी इलाइची 4
दालचीनी 6″
पीपर 4
पिपरामूर 2 ग्राम
लाल मिर्च, कालीमिर्च नमक स्वादानुसार
कालानमक 1 ,1/2 चम्मच
नोट : यह समस्त मसाले 1 किलो उङद की दाल के लिये है
कांजी बनाने से पूर्व एक भगौना पानी उबाल कर ठंडा कर के रख ले उबले पानी से कांजी बनाने से कांजी मे कीङे नही पङते
सभी मसालो को भिगो कर अर्थात पानी के साथ महीन पीस ले कढाई मे तेल गर्म करके हीग जीरे का तङका देकर मसाला भून कर अलग से उबाल कर ठंडा किया हुंआ पानी मिलाये इसी पानी मे तैयार बङे ठंडे कर के डाले
इरा जौहरी













