बेसन से बनी सब्जी रसाजें या कतीरे
रसाजें या कतीरे !!!
जी हाँ आज मैने रस मे डूबे रसाजें बनाये है हमारे मायके मे इसे रसाजें और ससुराल मे कतीरे कहा जाता है अलग अलग जगहो के अलग नाम
मसूर की दाल से कतीरे हमारी ससुराल मे बनते है सासूमां बनाती थी और यह हमारे मायके मे हमारी माँ की विधि है वह बेसन से बनाती है
थोड़ी देर पहले मैने यह पूँछा था और कई लोगो ने सही अंदाज़ा लगाया था
“आज कुछ बना रही हूँ जरा बताइये तो
हमने बेसन से ये रसाजें बनाये है जो गर्मी के मौसम मे झटपट बन गये और जो सब्ज़ियाँ आजकल आ रही है उनसे स्वाद मे थोड़ा बदलाव भी आ गया
विधि !!!
बेसन मे हीग नमक डाल कर पकौड़ी के घोल की तरह पतला घोल बनाये कढाई के अन्दर चारों तरफ जरा सी चिकनाई लगा कर घोल को डाल कर तेज़ व मध्यम आँच पर चलाते हुये पका कर हलुआ बनाये
पके हुये हलुये को थाली पर पानी लगा कर डाले और पानी लगे हाथो या करछुली से दबा कर फैलाये हवा मे रख कर ठंडा करे बर्फी या कतली की तरह काट ले इसे यूँ ही भी खाया जा सकता है
अब ख़ाली कढाई मे पानी डाल कर चिपके हुये बेसन को छुटा कर अलग करके रख ले
ख़ाली कढाई को गैस पर रखे तेल डाले गर्म करे और कटे हुये ठंडे क़तारों को तल कर निकाल ले बचे तेल मे हीँग जीरे से तड़का दे कर पिसा मसाला ( प्याज ,लहसन,अदरक, हल्दी ,धनिया ,मिर्च ,नमक ,गरममसाला ) डाल कर भून कर बेसन वाला पानी भी डाले और पकाये इस गाढे रसे ( ग्रेवी ) मे आहिस्ता से सारी रसाजें या कतीरे डाल दे रझने पर आहिस्ता से चलाये फिराये व भून कर सूखा खाना चाहे तो थोड़ा सूखा निकाल ले बाकी मे पानी डाल कर रसा लगा कर रझाये
और अन्त मे थोड़ा देशी घी गर्म करे गैस बन्द करदे पिसा गरममसाला व लालमिर्च डाल कर भून कर ऊपर से छौंक लगाये हरीधनिया से सज़ा कर परोसे
इरा जौहरी












