यह दिल
❆ फ़िलबदीह – 33
❆ विधा – ग़ज़ल / गीतिका
❆ काफिया – अत
❆ रदीफ़ – दिल क़ाबू मे ना रहा
❆ तिथि – 01 अप्रैल 2018
❆ वार – रविवार
हमे उनसे जो हुई मोहब्बत , अब ये दिल क़ाबू मे ना रहा ।
कर बैठे हम सभी से बग़ावत ,अब ये दिल क़ाबू मे ना रहा ।
करना तो चाही थी उनकी इबादत , पर आदत ने उनकी किया मजबूर ।
नज़रें जो हो गयी हम पर इनायत ,उनकी फिर से ये दिल क़ाबू में ना रहा ।
जो बैठे एक साथ समां हो जाये खूबसूरत ,तन्हाई अब जीने नही देती ।
रहे प्यार इरा तेरा सलामत ,क्योकि अब ये दिल क़ाबू मे ना रहा ।
इरा जौहरी
लखनऊ
इरा जौहरी की लेखनी से
१/४/२०१८



