कुपोषण का शिकार
*लेख १
*विषय -कुपोषण
समाज मे “कुपोषण का शिकार ” कौन है यह ढूँढने जो मै चली तो लगा कि बहुत से लोग हैं जो कुपोषण का शिकार हैं ।कुछ एसे लोग है जो बहुत ही निम्न वर्ग से आते है और कुछ एसे भी है जो निम्न मानसिकता के होते हैं ।यानी सबकुछ होता है फिर भी स्वास्थ्यप्रद भोजन करने ने कंजूसी करते है ,हाथ पैर नही हिलाना चाहते ,बस जो मिल जाये चाहे कैसा भी हो वही बहुत है ।कुछ समय पहले फेसबुक पर एक तस्वीर देखी थी ,जिसमें अफ़्रीका की किसी जनजाति के लोग थे ,जिनके पेट पीठ एकदम चिपके हुये थे जो वास्तव मे कुपोषण का शिकार लग रहे थे ।
हमारे देश मे भी कुछ एसी जगहें है जहाँ लोगो को साफ पीने का पानी भी मयस्सर नही होता जिसकी वजह से उन्हे तमाम बीमारियाँ घेर लेती हैं कई एसी भी जगहें है जहाँ उचित वर्षाजल के अभाव मे खेती ठीक तरह से नही हो पाती और किसान भूखा रह जाता है
करीब पैंतीस वर्ष पूर्व हमारा बिहार के ब्राम्बे गाँव मे उराँव जनजाति के बीच जाना हुआ था ।वहाँ हमने कुपोषण के शिकार बच्चे भी देखे थे ,जो बहुत ही दुबले पतले और कमज़ोर थे ।वास्तव मे समाज मे बहुत से लोग एसे भी है जिनके पास जरूरत से ज्यादा है और बहुत से लोगो के पास खाने को अन्न भी नही है ।हमने कही पढ़ा था कि बिहार मे कही इतनी ग़रीबी है कि ग़रीब व्यक्ति को गोबर से गेहूँ बीन कर अपना पेट भरना पड़ता है बिहार में ही एक जनजाति होती है जो चूहा मार कर अपना पेट पालती है ।पेट भर भोजन ना मिलने पर व्यक्ति कुपोषित ही होगा ।हमे यह सब जान कर ही खराब लगता है तो जिन पर यह गुज़रती होगी वो किस हाल मे अपना गुज़ारा करते होगे यह विचारणीय प्रश्न है ।
नन्हे नन्हे बच्चो को पेट की आग बुझाने के लिये अपने बचपन को ही खत्म करना पड़ता है एसे मे क्या वो कुपोषण के शिकार नहीं होगे ।
इरा जौहरी
लेख २
विषय – कुपोषण का शिकार
बात बहुत पुरानी हमारे बचपन की है धूरी शाम का समय हो चला था महरी अभी तक आई नहीं थी माँ ने कहा जाओ जरा देख कर आओ कि क्या बात हो गयी है अंधेरा हो चला था एसे मे मै साल भर बड़े भाई का हाथ थाम कर उसका घर ढूँढने निकल पड़ी वहाँ पँहुचने अँधेरा हो चला था देखा तो उसकी झोपड़ी मे मिट्टी गे तेल की कुप्पी टिमटिमा रही थी और उसकी रोशनी मे उसके बच्चे पानी सी पतली खिचड़ी खा रहे थे उसके बच्चे बहुत ही कमज़ोर नज़र आ रहे थे देख कर बहुत खराब लग रहा था उससे कहा कि माँ याद कर रही है और यह कह कर हम दोनो फौरन ही वापस आ गये और माँ को उसके बारे मे बताया तो माँ बोली उसके बच्चे कुपोषण के शिकार है इसी लिये एसे है अब माँ उसके लिये खाना बचा कर रखने लगी जो वह प्रेम से अपने साथ अपने घर ले जा कर बच्चो की क्षुधा शान्त करने लगी इससे धीरे धीरे उसके बच्चो का भी कुपोषण दूर होने लगा और वो स्वस्थ हो गये
हमारे ख़्याल से सभी को जरूरतमन्द लोगों का ख़्याल रखना चाहिये जिससे कोई भी कुपोषण का शिकार ना हो
इरा जौहरी
