स्टेपनी
लघुकथा
स्टेपनी
फेसबुक के आभासी मित्र और स्टेपनी
सुनन्दा फेसबुक के मैसेन्जर पर अपने आभासी मित्रों से बाते करने मे व्यस्त थी तभी दरवाज़े पर आहट हुई देखा तो सहेलियाँ आई हुई थी उसने तुरन्त फेसबुक बन्द किया और सबके साथ गप्पे लड़ाने बैठ गयी समय का पता ही नही चला । फिर सबके साथ घूमने के इरादे से निकल गयी रास्ते मे अचानक कार का टायर पंचर हो गया तो सबको स्टेपनी की याद आई ड्राइवर ने फटाफट पहिया बदला और आगे जा कर पहिया ठीक करा कर स्टेपनी की जगह लगा कर वापस रख दिया और सब फिर से आगे बढ गये सुनन्दा सोंचने लगी इस फेसबुक की आभासी दुनिया के मित्र भी स्टेपनी की तरह ही हैं जब कोई अपना पास नही होता सब स्टेपनी की तरह ही अपना बन साथ देते हैं फिर अपनो के पास आते ही सब वापस अपनी दुनिया मे चले जाते है ।
इरा जौहरी
स्टेपनी
१७/५/२०१८

