उड़ान बाकी है
लघुकथा
उड़ान बाकी है
समिधा सासूमाँ की सेवा में लगी हुई थी उनको पैरालिसिस का अटैक पड़ गया था।उसकी दोनो जिठानियों के साथ घर के सभी सदस्य पूरी तरह समर्पित भाव से उनके सभी कार्य कर रहे थे ।जब भी उनको किसी जाँच के लिये स्ट्रेचर पर ले जाया जाता वो कस कर पास खड़ी बहू का हाथ पकड़ लेतीं और दयनीय भाव से उसे देखतीं आँखों के इशारे से मानो कहतीं मुझे अकेला मत छोड़ना यह सब देख कर साथ खड़े लोगों का मन पिघलनें लगता उनकी दशा देख कर लगता मानो जिन्दगी के अन्तिम सफर में अभी कितना कष्ट सहना है ,अभी कितनी उड़ान बाकी है ।
इरा जौहरी
लखनऊ
उड़ान बाकी है
२०/६/२०१८

