सबल संकल्प
लघुकथा
– सबल संकल्प
आज फिर निशीथ ऑफ़िस मे सबसे झगड़ कर आये थे और ग़ुस्सा पत्नी और बच्चों पर उतर रहा था ।संयुक्त परिवार वाले घर के बाकी सदस्य यानी माता पिता भाई भाभी बहन व अन्य बच्चे सब देख रहे थे बच्चे घबरा कर अपने कमरों मे दुबक गये थे तो बड़े मुफ़्त मे फिल्म का मजा ले रहे थे ।सबको पता था कि थोड़ी ही देर में दोनो हँसते मुस्कुराते बाते करते नज़र आयेंगे ।तो फिर पति पत्नी के बीच आख़िर बोले कौन भाई की तरफ से बोलनें पर बीबियाँ नाराज़ और भाई को रोकने पर भाई के द्वारा खुद से बद्तमीजी करनें का भय तो सब चुप हो अपनें आप ही सब शान्त होने का इंतज़ार कर रहे थे ।धैर्य चुकने पर पिता जी की ज़ोरदार आवाज गूँजी ।शायद इसी पल का इंतज़ार था चुपचाप दोनो कमरे मे चले गये एक रोते हुये तो दूसरा बड़बड़ाते हुये ।घटना तो घट चुकी थी बहू ने स्वयं को बहुत अपमानित महसूस करते हुये एक सबल संकल्प लिया ।कि जो आज घटा अब घर मे कभी नहीं घटना चाहिये इसके लिये जब निशीथ का ग़ुस्सा ठंडा हुआ उसने अपने मन की बात कही ।इस पर निशीथ बोला देखो जब मैं तुम पर ग़ुस्सा किया करूँ तब तुम बिल्कुल भी नहीं बोला करो तुम्हारे बोलने से हमारा ग़ुस्सा और बढ जाता है और मैं भी ऐसा ही करूँगा फिर बात जल्दी खत्म हो जाया करेगी और सबके बीच हमारा मज़ाक़ भी नहीं बनेगा ।आगे जब भी एक ने ग़ुस्सा किया दूसरे ने अपने ग़ुस्से पर क़ाबू करते हुये ठंडा पानी पीना शुरू कर दिया ।उनके सबल संकल्प के कारण फिर कभी भी सबके सामने उन्हे अपमानित नहीं होना पड़ा ।
इरा जौहरी
स्वरचित
लघुकथा /सबल संकल्प
६/७/२०१८

