शहीद
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❆ लघुकथा सृजन
❆ विषय – शहीद
❆ तिथि – 03 जुलाई 2018
❆ वार – मंगलवार
गर्मी की तपती दुपहरी गाँव की सूनी सी गली में एक लड़की चली जा रही थी ।कुछ घबड़ाई हड़बड़ाई हुई सी ।वहीँ एक कच्चे घर में छुट्टियों में मक्खन सिंह बूढ़ी माँ के पास आया हुआ था ।माँ से उसनें वादा किया था कि इस बार वह उसके लिये दुल्हन पसन्द कर करके ही सरहद पर जायेगा ।दरवाज़े पर खटका हुआ मक्खन सिंह ने दरवाज़ा खोला उसे देख लड़की चौंक गयी अरे मखना तू !! मक्खन उसे देखता रह गया और संकोच के साथ किनारे हट गया ।लड़की तीर सी बूढ़ी अम्मा के पास चली गयी और सारी बात बता कर वैसे ही वापस हो गयी ।अम्मा बेटे को देख उसके दिल का हाल समझ गयी और लड़की के घर जा कर शादी तय कर आई ।छुट्टी पूरी होनें मे समय था तो सोचा लगे हाथ शादी भी कर दी जाये पर तभी दुश्मन द्वारा युद्ध का बिगुल फूँकनें के कारण सेना से वापसी का बुलावा आ गया ।मखना को जाना पड़ा ।और जब मखना आया तिरंगे के कफ़न मे लिपट कर घर आया उस लड़की की आँखें पथरा गयीं तब से दिन महीना साल गुजर गये उस लड़की ने बिना शादी किये ही मखना की जोगन बन खुद को शहीद की बूढी माँ सेवा में लगा दिया
इरा जौहरी
स्वरचित
लघुकथा /शहीद
३/७/२०१८

