बिखर गये अहसास
❆ काव्य सृजन –
❆ विषय – बिखर गये अहसास
❆ तिथि – 01 अक्टूबर 2018
❆ वार – सोमवार
पा कर भी तुमको ना जान पाई आज,
बैठी हुई तुमको ही सोंचा करती आज ।
वो धन दौलत व शान औ शौक़त नहीं ,
माँगे थे मैने बस तुम्हारे दो पल खास ।
सुने थे हीर रांझा लैला मजनूँ के किस्से ,
होना चाहते नही हम इनके जैसे उदास।
हताश निराश हो जिन्दगी में जब भी बैठूँ ,
चाहूँ यही कि बैठो कुछ पल तुम मेरे पास ।
पर अचानक तुम्हारे चले जाने से आज ,
टूट कर “इरा “ के बिखर गये अहसास।
इरा जौहरी
स्वरचित
काव्य /बिखर गये अहसास
१/१०/ २०१८
