पोखर

#100शब्दोंकीकहानी

#जियोअपनेसपने

“पोखर”

वह पोखर किनारे उदास बैठी थी एक तरफ प्रथम मिलन की याद वह पोखर था जहाँ बैठ कर कभी उसनें पति के साथ मिल कर सुनहरे भविष्य के सुन्दर सपनें सजाये थे ।दूसरी तरफ ठीक से कोई रोज़गार न होने की दशा में घर की गरीबी से निजात पानें के लिये पोखर को बेच कर आई रक़म से उज्वल भविष्य बनाने का बहू का सपना था ।बेटा अजीब कश्मकश में फँस गया था ।एक तरफ माँ तो दूसरी तरफ पत्नी के सपनें ।एसे में दिल कड़ा करके उसनें #जियो_अपने_सपने यह कह कर बहू के सपनों पर मुहर लगा दी।

इरा जौहरी 

मौलिक

कहानी/ पोखर

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8/9/2019