ग़ज़ल /मुद्दत हुई/काफिया मिलाना
.गजल/ मुद्दत हुई………
#काफ़िया_मिलाओ
काफिया -आया ही नहीं
दिनांक – 03 अक्टूबर 2018
मुद्दत हुई तुझको मैने कुछ दिखाया ही नही ,
तेरे सिवा और कोई हमार सरमाया ही नही ।
चाहने वाले तो बहुत हैं आज भी इस जमाने में ,
तेरे सिवा और किसी से कुछ फ़रमाया ही नही ।
दिल लुभाने के तो फसानें है बहुत जमाने में पर,
इस नादान दिल ने किसी को बिठाया ही नहीं।
आओ मिल कर बिताये यूँ ही खुशी के पल चार ,
वरना कहोगे गुलशन को कभी महकाया ही नहीं ।
गम ना कर लौटेगे कभी वो खुशी के तरानें भी ,
मुद्दतो से “इरा” ने तो कोई गीत गाया ही नही
इरा जौहरी
स्वरचित
★ #क़तील_शिफ़ाई जी द्वारा लिखित पूरी ग़ज़ल ★
.
प्यास वो दिल की बुझाने कभी आया भी नहीं
कैसा बादल है जिसका कोई साया भी नहीं
.
बेरुख़ी इससे बड़ी और भला क्या होगी
एक मुद्दत से हमें उस ने सताया भी नहीं
.
रोज़ आता है दर-ए-दिल पे वो दस्तक देने
आज तक हमने जिसे पास बुलाया भी नहीं
.
सुन लिया कैसे ख़ुदा जाने ज़माने भर ने
वो फ़साना जो कभी हमने सुनाया भी नहीं
.
तुम तो शायर हो “क़तील” और वो इक आम सा शख़्स
उसने चाहा भी तुझे और जताया भी नहीं
.
गजल / बड़ी मुद्दत हुई …
४/१०/२०१८



