काव्य/मुसाफिर हूँ मैं यारों
❆ काव्य सृजन –
❆ विषय – मुसाफिर हूँ मैं यारों
❆ तिथि – 08 सितम्बर 2018
❆ वार – सोमवार
आ चल रुक ना अब तू ,
दम भर छोटी सी जिन्दगी ।
पल भर में आनी जानी है ,
हर घड़ी मौत की रवानी है ।
ठहर जा आ तू लौट के आ ,
जी ले फुरसत के कुछ पल।
साथ मेरे बन मेरा हमसाया,
मेरे हमसफ़र बन जा तू हम।
मदमस्त है मौसम बड़ा ,
#मुसाफिर_हूँ_मै_यारों ।
पग ना “इरा” तुम रोकना,
बढ़ना और नित आगे बढ़ना ।
इरा जौहरी
स्वरचित
मुसाफ़िर हूँ मैं यारों /काव्य
८/१०/२०१८
