प्रेमिका
❆ काव्य सृजन –
❆ विषय – प्रेमिका
❆ तिथि – 24 सितंबर 2019
❆ वार -मंगलवार
मनमोहन तुमने पहले मुझमें मोह जगाया ,
फिर प्रेम डगर पर डगमग चलना सिखाया ।
प्रेमी बन प्रेम जाल फैला कर मुझे फँसाया
विरह में तेरे मैने विरहिनी सा जीवन बिताया।
मुझको त्याग अब देते तुम जोग की भिक्षा ,
क्यूँ लेते हो हमारी इतनी बड़ी कड़ी परीक्षा ।
प्रिय तुम मेरे और मैं तुम्हारी #प्रेमिका न्यारी ,
बसती थी कभी हृदय तुम्हारे लगती थी प्यारी ।
कह दो”इरा”से कि प्यार नहीं छलावा था वह ,
उस मनमोहक पल का क्षणिक दिखावा था वह ।
इरा जौहरी
मौलिक
काव्य /प्रेमिका
२४/९/२०१९

